सरकार ने ग्रामीण स्थानीय शासन को बढ़ावा देने के लिए 15वें वित्त आयोग के तहत आठ राज्यों में 1500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की है। ये राज्य अरुणाचल प्रदेश, गोवा, गुजरात, झारखंड, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना और उत्तराखंड हैं। पंचायती राज मंत्रालय ने कहा कि जारी की गई धनराशि में विभिन्न वित्तीय वर्षों से संबंधित नियमित किश्तें और रोकी गई राशियां शामिल हैं। इनका उद्देश्य राज्यों में ग्रामीण स्थानीय शासन को और मजबूत करना है।
पंचायती राज संस्थाओं द्वारा अप्रतिबंधित अनुदानों का उपयोग संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में निहित 29 विषयों के अंतर्गत वेतन और अन्य स्थापना लागतों को छोड़कर स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया जाता है। इसमें आगे कहा गया है कि बंधित अनुदानों का उपयोग स्वच्छता की बुनियादी सेवाओं और खुले में शौच मुक्त स्थिति के रखरखाव के लिए किया जा सकता है, जिसमें घरेलू कचरे का प्रबंधन और उपचार भी शामिल है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि अनुदानों का उपयोग पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण के लिए भी किया जाएगा।