मार्च 25, 2026 6:36 पूर्वाह्न

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सरकार का आश्वासन: पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त भंडार, एलपीजी उत्पादन बढ़ाया गया

सरकार ने आश्वासन दिया है कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार है और एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ा दिया गया है तथा सभी संयंत्र अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं। नई दिल्ली में पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रमों पर आयोजित अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने नागरिकों से अफवाहों पर विश्वास न करने और घबराहट में खरीदारी से बचने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने शहरी गैस वितरण कंपनियों को निर्देश दिया है कि जहां भी पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध है, वहां आवासीय स्कूलों और कॉलेजों, सामुदायिक और आंगनवाड़ी रसोई को 5 दिनों के भीतर पाइपलाइन के माध्यम से प्राकृतिक गैस से जोड़ा जाए। पीएनजी विस्तार के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि सोमवार को लगभग 7,500 घरेलू और वाणिज्यिक कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। संयुक्त सचिव ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति के कारण एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है, लेकिन बड़ी मात्रा में कार्गो तैयार है। उन्होंने आगे कहा कि एलपीजी वितरकों से किसी भी प्रकार की कमी की सूचना नहीं मिली है।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने दोहराया कि किसी भी बंदरगाह पर भीड़भाड़ नहीं है और सरकार समुद्री व्यापार को निर्बाध रूप से जारी रखने का पूरा प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक -पाइन गैस, 45 हजार मीट्रिक टन एलपीजी के साथ और जग वसंत-लगभग 47 हजार 600 मीट्रिक टन एलपीजी के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर चुके हैं और देश की ओर बढ़ रहे हैं।

विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर महाजन ने कहा कि सरकार, खाड़ी और पश्चिम एशिया क्षेत्र में विकसित हो रही स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी से अब-तक खाड़ी क्षेत्र से लगभग 4 लाख 2 हजार यात्री भारत लौट चुके हैं। साथ ही कहा कि आज संयुक्त अरब अमीरात के हवाई अड्डों से भारत के लिए लगभग 85 उड़ानें संचालित होने की उम्मीद है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया की स्थिति और इसके वैश्विक आर्थिक प्रभावों, विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा पर अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ चर्चा की। उन्होंने श्रीलंका के विदेश मंत्री से भी बात की, जहां दोनों पक्षों ने मौजूदा संघर्ष के परिणामों की समीक्षा की। प्रवक्ता ने बताया कि मंत्री ने ‘पड़ोसी पहले’ और ‘मिशन सागर’ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री ने नई दिल्ली में जीसीसी देशों के राजदूतों से भी मुलाकात की और संकट पर विचार-विमर्श किया, साथ ही क्षेत्र में रहने वाले भारतीय समुदाय को दिए जा रहे निरंतर समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।