विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत ने हमेशा टकराव के बजाय संवाद, विभाजन के बजाय सहमति और संकीर्ण हितों के बजाय मानव-केंद्रित विकास को प्राथमिकता दी है। मानवाधिकार परिषद के उच्च स्तरीय सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा कि कि संघर्ष, ध्रुवीकरण और अनिश्चितता से घिरी दुनिया में भारत साझा आधार खोजने और उसे मजबूत करने का प्रयास करता रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का दृष्टिकोण इस समझ पर आधारित है कि किसी भी क्षेत्र की असुरक्षा या किसी भी समूह को हाशिए पर धकेलना अंत में सभी के अधिकारों और कल्याण को कमजोर करता है।
डॉ. जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि भारत आतंकवाद के सभी रूपों के विरोध में दृढ़ और अडिग है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद मानवाधिकारों का सबसे जघन्य उल्लंघन है। श्री जयशंकर आतंकवाद का सामना करने के लिए सामूहिक संकल्प का आह्वान किया।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अभूतपूर्व पैमाने पर मानव क्षमताओं को विकसित करने में निवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, डीपीआई ने करोड़ों लोगों को पारदर्शिता और न्यूनतम रिसाव के साथ कल्याणकारी लाभ, वित्तीय सेवाओं और सार्वजनिक योजनाओं तक पहुंचने में सक्षम बनाया है।