केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि बिजली केवल ऊर्जा नहीं, बल्कि यह भविष्य का रोडमैप है। आज नई दिल्ली में भारत विद्युत शिखर सम्मेलन-2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने बिजली की सामर्थ्य पर जोर दिया और कहा कि भारत में बिजली कई अन्य देशों की तुलना में अधिक सस्ती है।
उन्होंने ये भी कहा कि सरकार ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ नेटवर्क के अंतर्गत संयुक्त अरब अमीरात के साथ मिलकर समुद्र के नीचे बिजली पारेषण केबल नेटवर्क स्थापित करने की योजना बना रही है। श्री मनोहर लाल ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने बिजली पारेषण के लिए दो लाख नौ हजार सर्किट किलोमीटर लाइनें जोड़ी हैं।
इस अवसर पर नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन छह गुना अधिक बढ़कर 11 दशमलव 8 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि इस समय देश में 300 घरेलू विनिर्माता हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिखर सम्मेलन के लिए लिखे अपने पत्र में कहा है कि 50 प्रतिशत से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के साथ, भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि यह शिखर सम्मेलन संपूर्ण विद्युत और ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र को एक मंच पर लाता है ताकि विचारों का आदान-प्रदान कर सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके। इसके अतिरिक्त विद्युत विकास तथा जीवन स्तर में सुधार के लिए एक साझा मार्ग प्रशस्त किया जा सके।