रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन – डीआरडीओ द्वारा विकसित हथियारों की निर्णायक भूमिका, राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में संगठन की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। आज 68वें स्थापना दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री ने नई दिल्ली में डीआरडीओ मुख्यालय का दौरा कर सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों से लैस करके भारत की स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए डीआरडीओ की सराहना की। वायु रक्षा के महत्व का उल्लेख करते हुए श्री सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि डीआरडीओ इस लक्ष्य को जल्द से जल्द हासिल करने के लिए पूरे मनोयोग से काम करेगा। रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ से तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र के साथ तालमेल बिठाते हुए ऐसे उत्पाद विकसित करने का आह्वान किया जो बदलते समय में प्रासंगिक बने रहें। उन्होंने संगठन से नवाचार पर अपना ध्यान बनाए रखने और ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने का आग्रह किया जिनमें निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई जा सके।
इस दौरान रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने रक्षा मंत्री को मौजूदा जारी अनुसंधान और विकास गतिविधियों, संगठन की उपलब्धियों, उद्योग, स्टार्ट-अप और 2026 के रोडमैप के बारे में जानकारी दी।