राज्यसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2023-24 में विकास दर 12 % थी जो वर्ष 2024-25 में घटकर9.8 % और वर्ष 2025-26 में घटकर 8 % रह गई है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटा 4 दशमलव 4 प्रतिशत है, लेकिन अगले वर्ष यह घटकर केवल 4.3% ही रहेगा। वहीं चालू वित्त वर्ष में राजस्व घाटा 1.5% है और अगले वर्ष भी यह इतना ही रहेगा। श्री चिदंबरम ने राजस्व घाटे को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बेरोजगारी के मुद्दे पर श्री चिदंबरम ने कहा कि 144 करोड़ की आबादी वाले देश में केवल 195 लाख लोग ही कारखानों में कार्यरत हैं और विनिर्माण क्षेत्र कई वर्षों से 16 % पर ही है। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने बजट में आवंटित राशि पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विज्ञान, सामाजिक कल्याण और शहरी क्षेत्रों में कटौती की गई है। कांग्रेस नेता ने कहा कि कई योजनाओं की घोषणा की गई, लेकिन उनका आवंटन कम था या फिर घोषित ही नहीं की गई।
भाजपा सांसद अरुण सिंह ने कहा कि बजट का आकार तीन गुना बढ़ाकर 53 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि यूपीए शासन में यह मात्र 16 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा अधिक था। उन्होंने बताया कि गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के लिए भारी बजट आवंटित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सुनिश्चित किया है कि 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों को हस्तांतरित की जाए और अनाज तथा बागवानी का उत्पादन बढ़ा है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष के मनरेगा आवंटन की तुलना में विकसित भारत जीराम जी परियोजनाओं के लिए बजट आवंटन में 42 % की वृद्धि हुई है।
तृणमूल कांग्रेस की सुष्मिता देव ने आरोप लगाया कि बजट में विकास और गरीबी उन्मूलन पर दिए गए आंकड़ों में कई कमिया हैं। उन्होंने जनगणना कराने में देरी को लेकर सरकार की आलोचना भी की।
डीएमके के पी. विल्सन ने आरोप लगाया कि बजट में किसानों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है कि भारत का कर्ज बढ़कर 215 ट्रिलियन रुपये हो गया है, जो जीडीपी का लगभग 56 % है।
आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी जैसी आभासी डिजिटल संपत्तियों के लिए कड़े नियमन और अनुपालन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कई निवेशक विदेशों में जा रहे हैं, इसलिए उन्हें देश देश में लाया जाना चाहिए।
बीजू जनता दल के मुजीबुल्ला खान ने कहा कि बजट ओडिशा के लिए निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि चाहे कृषि क्षेत्र हो या रेलवे, राज्य की उपेक्षा की गई है।
ऑल इंडिया अन्ना- डीएमके के एम. थंबीदुरई ने कहा कि बजट में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के कपड़ा उद्योग केंद्रों को इस बजट से लाभ होगा। सदन में चर्चा जारी है।
मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति ने कहा कि पिछले 10-12 वर्ष में भारत में एक बड़ा बदलाव आया है, जिसका असर पूरी दुनिया में महसूस किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्थिर सरकार, स्थिर वित्त व्यवस्था, साहसिक बजट और नेतृत्व ने इस बदलाव को संभव बनाया है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के ए.ए. रहीम ने देश में बढ़ती मंहगाई पर चिंता व्यक्त की। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जनवरी 2026 में बेरोजगारी दर का छह दशमलव आठ-पांच प्रतिशत होना चिंताजनक है।
जनता दल यूनाईटेड के संजय कुमार झा ने कहा कि केंद्रीय बजट से पता चलता है कि सरकार देश के दीर्घकालिक विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि राजकोषीय अनुशासन और आर्थिक रणनीति के साथ-साथ अब क्षमता निर्माण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
आम आदमी पार्टी के डॉ. अशोक कुमार मित्तल, समाजवादी पार्टी की जया बच्चन, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सज्जाद अहमद किचलू, तृणमूल कांग्रेस (एम) के जी.के. वासन और राष्ट्रीय जनता दल के ए.डी. सिंह समेत कई सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया। बाद में सदन में विशेष मुद्दो पर चर्चा हुई। सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई।