मार्च 30, 2026 5:31 अपराह्न

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लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त कराने के प्रयासों पर चर्चा शुरू

लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त कराने के प्रयासों पर चर्चा शुरू हुई। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने नरेंद्र मोदी सरकार, अर्धसैनिक बलों और पुलिस बलों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने वामपंथी उग्रवाद से लड़ते हुए जान गंवाने वाले सभी सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि भी दी। श्री शिंदे ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए पार्टी जनजातीय और पिछड़े समुदायों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने में विफल रही, जिसके कारण उन्हें हथियार उठाने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि एक समय था जब जनजातीय लोगों का शोषण हुआ और उन्हें नक्सलवाद की आग में धकेल दिया गया, लेकिन आज स्थिति बदल गई है। उन्होंने कहा कि अब एक जनजातीय महिला देश की राष्ट्रपति हैं।

    उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने जनजातीय लोगों गरीबों और हाशिए पर रहने वाले लोगों का विश्वास फिर से हासिल कर लिया है। श्री शिंदे ने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से रेड कॉरिडोर अब विकास कॉरिडोर में परिवर्तित हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश के 200 जिलों में फैला वामपंथी उग्रवाद अब सिर्फ तीन जिलों तक सिमट गया है।

कांग्रेस के सप्तगिरि शंकर उलका ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान नक्सलवाद को खत्म करने के लिए कई प्रयास किए गए थे। उन्होंने कहा कि पुलिस बलों का आधुनिकीकरण किया गया और 2008 में कोबरा यूनिट की स्थापना की गई। उन्होंने यह भी कहा कि यूपीए सरकार के दौरान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों और स्कूलों का निर्माण किया गया था।

    भाजपा के संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार ने नक्सलियों को संरक्षण दिया। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2010 में यूपीए शासनकाल के दौरान एक ही दिन में 75 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे।

    टीडीपी के बायरेड्डी शबरी ने आरोप लगाया कि यूपीए शासनकाल के दौरान 2004 से 2014 के बीच नक्सली हमलों की संख्या सबसे अधिक रही। उन्होंने कहा कि एक गांव से शुरू हुआ नक्सलवाद कांग्रेस सरकार की कमजोर नीतियों के कारण बाद में दस राज्यों के 182 जिलों में फैल गया।