छत्तीसगढ़ विधानसभा ने धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक को ध्वनि-मत से पारित कर दिया है। इस विधेयक का उद्देश्य धोखे से, बलपूर्वक, प्रलोभन देकर या डिजिटल तरीके से धर्म परिवर्तन पर रोक लगाई गई है। विपक्ष ने इस विधेयक के विरोध में सदन का बहिष्कार किया। विपक्ष का कहना था कि इस तरह के 11 राज्यों से संबंधित मामले सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है और सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद ही इस मामले में आगे बढ़ा जाना चाहिए। जवाब में, उप-मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस तरह के किसी भी मामले में रोक नहीं लगाई है और अवैध धर्मांतरण पर अंकुश लगाना राज्य सरकार के अधिकार-क्षेत्र में आता है।
विधेयक में गलत तरीके से धर्मांतरण को गैर-जमानती अपराध माना गया है जिसके लिए सात से दस साल तक की सज़ा हो सकती है। इसके अलावा, दोषी पाए जाने पर न्यूनतम 5 लाख रूपए तक का जुर्माना भी भरना होगा। विधेयक के अनुसार, धर्मांतरण के इच्छुक लोगों को इसकी पूर्वानुमति लेनी होगी।