बॉम्बे उच्च न्यायालय ने आज पुणे पोर्श दुर्घटना मामले में आरोपी नाबालिग को रिहा करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने निर्देश दिया है कि नाबालिग को उसकी चाची की देखरेख में रखा जाए और मनोवैज्ञानिक के साथ उसके परामर्श सत्र जारी रहें।
यह आदेश नाबालिग की चाची द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर पारित किया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि नाबालिग को किशोर न्याय बोर्ड द्वारा एक संप्रेक्षण गृह में गैरकानूनी और मनमाने ढंग से हिरासत में रखा गया है। अदालत ने किशोर न्याय बोर्ड के हिरासत आदेशों को रद्द करते हुए यह फैसला सुनाया।