एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए उस पर मूलभूत अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया है और अगले महीने राष्ट्रीय चुनाव से पहले सुधारात्मक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद युनुस को लिखे खुले पत्र में एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने कहा है कि अंतरिम प्रशासन जन विश्वास हासिल करने में असफल रहा है। उनका कहना है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का अब तक का आचरण 12 फरवरी को होने वाले चुनाव की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाता है।
सुश्री कैलामार्ड ने पत्रकारों और असंतुष्ट लोगों के खिलाफ आतंकरोधी कानून का दुरुपयोग करने की आलोचना की है। उन्होंने संवाददाताओं – मोंजुरुल आलम पन्ना और अनीस आलमगीर की गिरफ्तारी को मनमाना और राजनीति से प्रेरित बताया है। सुश्री कैलामार्ड ने आगाह किया कि चुनाव के समय महत्वपूर्ण आवाजों को दबाने से लोकतांत्रिक भागीदारी कमजोर होती है और यह अंतर्राष्ट्रीय कानून के अंतर्गत बांग्लादेश के दायित्वों का उल्लंघन है।
पत्र में बढती हिंसा के बीच अभिव्यक्ति की आजादी और लोगों की सुरक्षा करने में विफल रहने पर प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दिसम्बर 2025 में मीडिया के दफ्तरों पर हमले, संपादकों का उत्पीडन, हिन्दू व्यक्ति दीपू चन्द्र दास की भीड द्वारा पीट-पीटकर हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की कमजोर कार्रवाई ने अल्पसंख्यकों, पत्रकारों और आलोचकों की जिंदगी को गंभीर खतरे में डाल दिया है। सुश्री कैलामार्ड ने कहा कि अपने विचार अभिव्यक्त करने के लिए लोगों को डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति पर पाबंदियां लगाकर सरकारी संस्थाओं पर लोगों का विश्वास बहाल होने की बजाय कमजोर हो रहा है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों पर हस्ताक्षरकर्ता देश होने के बावजूद अंतरिम सरकार की कार्रवाई उन संकल्पों का विरोधाभास है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन अभिव्यक्ति की आजादी की तत्काल गारंटी नहीं देता तो चुनाव प्रक्रिया दमन और भय से प्रभावित हो सकती है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने युनुस के नेतृत्व वाले प्रशासन से दमनकारी कानूनों को तत्काल समाप्त करने, हिंसा के लिए जबावदेही तय करने तथा राजनीतिक भागीदारी के लिए समावेशी माहौल बनाने का आहवान किया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने में विफल रहने पर लगातार मानवाधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा।