भारत ने कहा है कि ब्रिक्स के नेताओं के घोषणा पत्र ने ग्लोबल साउथ के देशों की अधिकतर चिंताओं को समाहित किया है।
ब्राजील के रियो द जनेरियो में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन के समापन के बाद संवाददाताओं से बातचीत में विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंधों के सचिव दम्मु रवि ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बहुपक्षीय वैश्विक संगठनों में सुधार की आवश्यकता की बात जोरदार तरीके से कही।
श्री मोदी ने स्मरण करते हुए कहा कि 20वीं सदी के संगठनों में 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने की क्षमता का अभाव है और बहुध्रुवीय तथा समावेशी विश्व व्यवस्था की आवश्यकता है। एक सत्र में प्रधानमंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन में समकालीन वास्तविकताओं और चुनौतियों को दर्शाने के लिए तत्काल सुधार की आवश्यकता है।
सचिव, दम्मी रवि ने भी कहा कि इस शिखर सम्मेलन में पहलगाम आतंकवादी हमलों की निंदा सभी देशों ने जोरदार तरीके से की। उन्होंने कहा कि घोषणा पत्र, भारत के पड़ोसी देश को एक कड़ा संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला और जिम्मेदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-ए.आई. पर कार्य करने, उसे सुरक्षित और लचीला बनाने पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए ग्लोबल साउथ के देशों द्वारा ब्रिक्स में विज्ञान और अनुसंधान कोष स्थापित करने के सुझाव दिए। क्यूबा के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक को लेकर दम्मी रवि ने कहा कि क्यूबा ने भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और यूपीआई भुगतान गेटवे प्रणाली में काफी रूचि दिखाई।