कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने आज तृणमूल कांग्रेस नेता की दो जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं में पश्चिम बंगाल में निर्वाचन आयोग द्वारा शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादलों के फैसलों को चुनौती दी गई थी। पार्टी के लोकसभा सदस्य कल्याण बनर्जी ने याचिकाकर्ता के वकील के रूप में इस मामले में पैरवी की।
दो जनहित याचिकाओं में से एक मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, पुलिस आयुक्त जैसे शीर्ष स्तर के सरकारी अधिकारियों के तबादलों से संबंधित थी। दूसरी याचिका राज्य में सामान्य और पुलिस प्रशासन के निचले स्तर के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के तबादलों से संबंधित थी, जिनमें रिटर्निंग ऑफिसर और पुलिस इंस्पेक्टर भी शामिल हैं।
मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने जनहित याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि आचार संहिता लागू होने के दौरान आयोग को प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के तबादलों का पूरा अधिकार है। खंडपीठ ने पश्चिम बंगाल में जानबूझकर सामान्य और पुलिस प्रशासन के शीर्ष स्तर पर किए गए तबादलो के याचिकाकर्ता के तर्क को खारिज कर दिया, क्योंकि अन्य चुनाव वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसा नहीं हुआ। खंडपीठ के अनुसार, इस बात का कोई सबूत नहीं था कि निर्वाचन आयोग के फैसले से राज्य सरकार के कामकाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा हो।