भारत ने आज कहा कि एक सौ चालीस करोड़ देशवासियों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। नई दिल्ली में आज दोपहर बाद संवददाताओं से बातचीत में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि बाजार की परिस्थितियों और विकसित हो रही अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता के अनुरूप देश के ऊर्जा स्रोतों में विविधता को सुनिश्चित करना सरकार की रणनीति का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि भारत सभी कदम उठा चुका है और वह इसे ध्यान में रखकर आगे की कार्यवाही करेगा।
वेनेजुएला के तेल पर एक प्रश्न का उत्तर देते हुए रणधीर जायसवाल ने कहा कि व्यापार और निवेश को सम्मिलित करते हुए ऊर्जा क्षेत्र में वेनेजुएला भारत का एक दीर्घकालिक साझेदार रहा है। उन्होंने कहा कि 2019-20 तक भारत के कच्चे तेल के मुख्य स्रोतों वाले देशों में वेनेजुएला रहा है। प्रतिबंधों के बाद इस स्रोत को रोक दिया गया है। प्रतिबंधों को पुन: लागू किये जाने के कारण इस स्रोत को एक बार फिर रोके जाने से पहले 2023-24 में वेनेजुएला से आयात को फिर शुरू किया गया। प्रवक्ता ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय उपक्रम वेनेजुएला की राष्ट्रीय तेल कंपनी के साथ साझेदारी रखते हैं। इन उपक्रमों की उपस्थिति वेनेजुएला में वर्ष 2008 से बनी हुई है। प्रवक्ता ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के प्रति भारत के प्रयास की निरंतरता के अंतर्गत वेनेजुएला सहित किसी भी कच्चे तेल आपूर्ति के नये विकल्पों के वाणिज्यिक हित को तलाशने के लिए भारत का द्वार खुला है।
अमरीका के शुल्क को लेकर प्रवक्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से टेलीफोन पर बातचीत की। इस बातचीत के बाद प्रधानमंत्री ने पारस्परिक शुल्क में कमी के लिए राष्ट्रपति ट्रंप को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस बात पर ध्यान दिया कि अब मेड इन इंडिया उत्पादों का निर्यात अमरीका को 18 प्रतिशत के कम शुल्क पर किया जा सकेगा। रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह व्यापार समझौता भारत के निर्यात, श्रम प्रधान उद्योगों, रोजगार सृजन, विकास को बढ़ावा देगा और जनता के लिए समृद्धि लाएगा। उन्होंने बताया कि अमरीकी पक्ष ने भी स्पष्ट किया है कि शुल्क की अंतिम सीमा 18 प्रतिशत है।