स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने रक्त उत्पादों के परीक्षण से संबंधित औषधि नियम, 1945 की अनुसूची एफ के पैरा जी में संशोधन के एक प्रस्ताव पर जनता से सुझाव आमंत्रित किए हैं। मंत्रालय ने बताया कि इस संशोधन का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत औषध संघ के मानक के साथ भारत के नियामक ढांचे को उसके अनुरूप बनाना है।
भारतीय, ब्रिटिश, अमरीकी और यूरोपीय फार्माकोपिया के अनुसार मानव प्लाज्मा के अलग किए जाने से पहले हेपेटाइटिस बी सरफेस एंटीजन, हेपेटाइटिस सी वायरस आरएनए और एचआईवी एंटीबॉडी के लिए इसका परीक्षण अनिवार्य है।
मंत्रालय ने बताया कि वर्तमान में अंतिम उत्पादों का उन्हीं मानकों के लिए दोबारा परीक्षण किया जाता है। प्रस्तावित संशोधन इस प्रकार के अनावश्यक परीक्षण को हटाने का प्रावधान करता है। वहीं, यह संशोधन रोगियों के लिए उच्च सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करता है।