नवम्बर 14, 2025 9:21 अपराह्न

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सेबी ने आईपीओ प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव दिया

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने आईपीओ प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव दिया है। इसमें आईपीओ-पूर्व गिरवी रखे गए शेयरों को लॉक करने में लंबे समय से आ रही बाधाओं का समाधान और प्रस्ताव दस्तावेजों को सरल बनाना शामिल है।

 

प्रस्तावों को एक नए परामर्श पत्र में उल्लिखित किया गया है। इसके लिए पूंजी निर्गम और प्रकटीकरण आवश्यकताएं – आईसीडीआर विनियम, 2018 में संशोधन की आवश्यकता होगी।

   

वर्तमान नियमों के तहत, प्रमोटरों के अलावा सभी प्री-इश्यू शेयरहोल्डिंग को आईपीओ के बाद छह महीने के लिए लॉक किया जाना चाहिए। डिपॉजिटरीज गिरवी रखे गए शेयरों पर लॉक-इन लागू करने में असमर्थ हैं। इस कारण अक्सर जारीकर्ताओं के लिए अंतिम समय में अनुपालन संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं, विशेष रूप से उन कंपनियों में जिनके शेयरधारक बहुत अधिक हैं या जिन्हें ढूंढना कठिन है।

   

इस समस्या के समाधान के लिए सेबी ने सुझाव दिया है कि डिपॉजिटरी को जारीकर्ता कंपनी के निर्देशों के आधार पर, गिरवी रखे गए प्री-आईपीओ शेयरों को लॉक-इन अवधि के लिए गैर-हस्तांतरणीय के रूप में चिह्नित करने की अनुमति दी जाए। नियामक ने कहा कि इससे अनुपालन आसान होगा और आईपीओ प्रक्रिया में देरी कम होगी।

   

सेबी ने अनिवार्य संक्षिप्त सूचीपत्र को भी समाप्त करने का प्रस्ताव दिया है। यह वर्तमान में प्रत्येक आईपीओ आवेदन के साथ अनिवार्य है। इसके स्थान पर, नियामक एक मानकीकृत प्रस्ताव दस्तावेज़ सार प्रस्तुत करने का इरादा रखता है।

 

इसका उद्देश्य निवेशकों को अधिक स्पष्ट, संक्षिप्त जानकारी प्रदान करना है। नियामक ने आईसीडीआर ढांचे में संशोधनों पर आगे बढ़ने से पहले प्रस्तावित परिवर्तनों पर सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।

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