39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले का आज समापन हो गया। इस अवसर पर एक भव्य समापन समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह के मुख्य अतिथि हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर असीम घोष रहे। इस समारोह में शिल्पकारों, बुनकरों को अपनी बेहतरीन कला प्रदर्शित करने के लिए सम्मानित किया गया। परंपरागत श्रेणी, कला रत्न श्रेणी, कला निधि श्रेणी के कलाकारों को 11000 रुपए की धन राशि का चेक प्रदान किए गए। साथ ही अन्य शिल्पकारों को 5100 रुपए की धन राशि की घोषणा की गयी। सर्वश्रेष्ठ विदेशी पुरस्कार श्रेणी में मिस्र के गीहान खलीफा को कढ़ाई कला, श्रीलंका की इरेशा को बाटिक शिल्प, अल्जीरिया के होसिन नेज्जार को हैंड वीविंग तथा मिस्र के एम.डी. एमपैपी को धातु औऱ पीतल प्लेट तथा लैम्प शिल्प के लिए चुना गया है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पर्यटक, शिल्पकार और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। इस तरह के आयोजन का उद्देश्य भारत की समृद्ध हस्तशिल्प और वस्त्र परंपरा को प्रोत्साहित करना तथा युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोडऩा है।
इस मेले में विदेशी कलाकारों के पारंपरिक नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक झलकियों ने दर्शकों को अपने-अपने देशों की समृद्ध विरासत से रूबरू कराया। कलाकारों की ऊर्जा और आकर्षक प्रस्तुति का दर्शकों ने भरपूर आनंद उठाया। मेले में उमड़ी दर्शकों की भीड़ ने यह साबित कर दिया कि सूरजकुंड मेला सांस्कृतिक विविधता और वैश्विक एकता का अनूठा संगम बन चुका है।