सर्वोच्च न्यायालय ने आज 17 राज्यों को नोटिस जारी कर एनआईए की विशेष अदालतों की स्थापना सुनिश्चित करने को कहा है। यह नोटिस उन राज्यों के लिए है जहां आतंकरोधी कानूनों के तहत 10 या उससे अधिक मामले लंबित हैं। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत व्यापक स्थिति रिपोर्ट के बाद राज्यों से जवाब मांगा है।
पीठ ने 17 राज्यों के मुख्य सचिवों को तीन सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पर जवाब देने और ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई तथा न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालतों की स्थापना करने को कहा है। पीठ ने कहा कि यदि लंबी सुनवाई के बाद किसी आरोपी को बरी कर दिया जाता है तो सुनवाई में देरी अन्याय का कारण बनती है।
अपर सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि गृह मंत्रालय ने इन विशेष अदालतों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के मानदंडों को अंतिम रूप दे दिया है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार प्रत्येक विशेष न्यायालय के लिए गैर-आवर्ती व्यय हेतु एक करोड़ रुपये का एकमुश्त अनुदान और आवर्ती व्यय हेतु प्रति वर्ष एक करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान करेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन निधियों का उपयोग बुनियादी ढांचे के नवीनीकरण, सूचना प्रौद्योगिकी उपकरणों, वाहनों और कर्मचारियों के वेतन के लिए किया जाएगा।