सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक निर्णय में पश्चिम बंगाल सरकार से अपने कर्मचारियों को बकाया महंगाई भत्ते का 25% तुरंत जारी करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति संजय करोल और प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि राज्य को एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कार्यबल के लिए न्याय सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा, तिलक सिंह चौहान और गौतम मघुरिया की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। समिति 6 मार्च तक कुल बकाया राशि और भुगतान की निश्चित समय-सारणी निर्धारित करने का कार्य करेगी। न्यायालय द्वारा निर्धारित समय-सीमा के अनुसार, शेष 75% की पहली किस्त 31 मार्च तक जमा करनी होगी। 15 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई तक एक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी।
यह विवाद 2008 से 2019 तक के बकाया भुगतानों से संबंधित है। इस विवाद से राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच महंगाई भत्ते में 40% का अंतर हो गया है। इस निर्णय से लगभग 12 लाख वर्तमान और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो मुकदमे की सुनवाई के दौरान सेवानिवृत्त हुए थे।