सुप्रीम कोर्ट ने नीट परीक्षा मामले पर सुनवाई करते हुए सीबीआई से अब तक की जांच की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि परीक्षा की पवित्रता प्रभावित हुई है, यह तो स्पष्ट है। अगर परीक्षा वाले दिन ही बच्चों को पेपर मिला और उसे याद किया गया, इसका मतलब पेपर केवल स्थानीय स्तर पर ही लीक हुआ था। लेकिन अगर हमें यह पता नहीं चलता कि कितने स्टूडेंट इसमें शामिल थे, तब दोबारा परीक्षा का आदेश देना पड़ेगा। इस मामले की अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि हमें यह भी देखना होगा कि पेपर लीक कैसे हुआ। अगर सोशल मीडिया के जरिए हुआ, इसका मतलब व्यापक पैमाने पर पेपर लीक हुआ होगा। चीफ जस्टिस ने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि पेपर सेटिंग की पूरी प्रक्रिया क्या होती है। प्रिंटिंग प्रेस में कैसे और किसके साथ भेजा गया। प्रेस से बैंक में कैसे भेजा गया। इससे पता लगाने में आसानी होगी कि पेपर कहां से लीक हुआ। कोर्ट ने कहा कि पेपर लीक हुआ है, इसमें दो राय नहीं है। अब यह देखना है कि यह कैसे हुआ है और कितना हुआ है।
चीफ जस्टिस ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि अगर परीक्षा कैंसल नहीं होती तो धांधली से पास हुए स्टूडेंट्स को कैसे चिन्हित करेंगे। चीफ जस्टिस ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि आप सरकार से पूछ कर बताइए क्या हम साइबर फोरेंसिक विभाग में डेटा एनालिटिक्स प्रोग्राम के माध्यम से सच पता नहीं लगा सकते हैं क्योंकि हमें यह पहचानना है कि क्या पूरी परीक्षा प्रभावित हुई है। क्या गलत करने वालों की पहचान संभव है। उस स्थिति में केवल उन छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा का आदेश दिया जा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ कुल 38 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इससे पहले, शीर्ष अदालत के समक्ष दायर एक हलफनामे में, केंद्र और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी-एनटीए ने कहा था कि परीक्षा में अनियमितताओं के किसी भी सबूत के अभाव में परीक्षा दोबारा आयोजित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। नई परीक्षा से लाखों वास्तविक उम्मीदवार प्रभावित होंगे।