उच्चतम न्यायालय ने आज केंद्र सरकार से देश के विभिन्न हिस्सों से बच्चों के लापता होने की घटनाओं के पीछे किसी राष्ट्रव्यापी नेटवर्क या राज्य-विशिष्ट समूह की मौजूदगी का पता लगाने को कहा है। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरतना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान की पीठ ने कहा कि यह पता लगाना जरूरी है कि इन घटनाओं के पीछे कोई समानता है या ये आकस्मिक घटनाएं हैं।
शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को सभी राज्यों से आंकड़े एकत्र करने को कहा है। न्यायालय ने सुझाव दिया कि बचाए गए बच्चों से पूछा जाना चाहिए कि ऐसी घटनाओं के लिए कौन जिम्मेदार है।
सरकार की ओर से अपर सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि कुछ राज्यों ने लापता बच्चों और अभियोजन से संबंधित आंकड़े दिए हैं, लेकिन लगभग एक दर्जन राज्यों ने अपने आंकड़े नहीं दिए हैं। उन्होंने कहा कि इसका विश्लेषण तभी किया जा सकता है जब सरकार को पूरे आंकड़े मिल जाएं। पीठ ने आंकड़े न देने वाले राज्यों की आलोचना की और कहा कि जरूरत पड़ने पर वह इस संबंध में कड़े आदेश पारित कर सकती है। न्यायालय एक गैर सरकारी संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कई राज्यों में लापता बच्चों की बढ़ती संख्या को उजागर किया गया था।