उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने कहा है कि परम्परागत बुद्धिमत्ता और आधुनिक विज्ञान का एकीकरण स्वस्थ जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। चेन्नई में आज राष्ट्रीय सिद्ध दिवस से संबंधित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सिद्ध एक जीवंत परम्परा है न कि अतीत का अवशेष। उपराष्ट्रपति ने महान ऋषि अगस्त्य को श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने समकालीन स्वास्थ्य सेवा में औषधि की सिद्ध पद्धति की टिकाऊ प्रासंगिकता का उल्लेख किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आयुष के अंतर्गत सिद्ध, आयुर्वेद, यूनानी और योग जैसी परम्परागत स्वास्थ्य प्रणालियां समय की कसौटी पर परखी गईं चिकित्सा विधाएं हैं। यह करोड़ों लोगों के आरोग्य में सतत योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि शरीर, मस्तिष्क और प्रकृति के बीच सामंजस्य पर जोर देते हुए, स्वास्थ्य, निवारक देखभाल और जीवनशैली प्रबंधन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करती है।
यह प्रणाली जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों, तनाव और पर्यावरण की चुनौतियों से प्रभावित युग में विशेष रूप से प्रासंगिक है। इससे पहले, केन्द्रीय आयुष राज्य मंत्री, केन्द्रीय आयुष, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रताव राव जाधव ने कहा कि सिद्ध औषधि उपचार का एक प्राचीन रूप है। नौंवे सिद्ध दिवस के अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतीय औषधि वैज्ञानिक और आध्यात्मिक उपचार का एक प्रकार है। ये औषधियां आधुनिक बीमारियों का उपचार कर सकती हैं।