सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें राज्य सरकार के अन्य पिछड़ा वर्ग -ओबीसी आयोग को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के निर्णय पर रोक लगाई गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा एन.वी.अंजारी की पीठ ने आज कहा कि ऐसे मामले आम तौर पर नीतिगत निर्णयों से संबंधित होते हैं और न्यायिक क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आते। हालांकि, पीठ ने उच्च न्यायालय को कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के जवाब पर विचार करने के बाद याचिका की जांच करने को कहा। न्यायालय ने सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 9 जनवरी को, राम लाल शर्मा द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार के 7 जनवरी के निर्णय पर रोक लगा दी थी। इस याचिका में आयोग के मुख्यालय को धर्मशाला स्थानांतरित करने और शिमला को अध्यक्ष के शिविर कार्यालय के रूप में बनाए रखने के निर्णय को चुनौती दी गई थी।