सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण-एसआईआर से संबंधित एक याचिका के संबंध में निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को नोटिस जारी कर इस महीने की 9 तारीख तक जवाब देने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा मतदाता सूची के एसआईआर में हस्तक्षेप की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मुख्य न्यायाधीश ने आयोग को निर्देश दिया कि वे बूथ स्तर के अधिकारियों और मतदाता सूची अधिकारियों को मामूली विसंगतियों के आधार पर नोटिस जारी करते समय अधिक संवेदनशील रहें।
ममता बनर्जी स्वयं सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुईं। उन्होंने पांच मिनट की बहस की अनुमति मांगी। मुख्य न्यायाधीश ने जवाब दिया कि न्यायालय उन्हें अपनी बात रखने के लिए पांच नहीं, बल्कि 15 मिनट देगा।
ममता बनर्जी ने राज्य में मतदाता सूची के एसआईआर को चुनौती दी है और चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की है कि वह किसी अन्य दस्तावेज पर जोर दिए बिना आधार कार्ड को पहचान के प्रमाण के रूप में स्वीकार करे।
निर्वाचन आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने एसआईआर प्रक्रिया की देखरेख के लिए 80 ग्रेड-टू अधिकारियों की सेवाएं प्रदान की थीं।