सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में उन्होंने तीन सदस्यीय आंतरिक जाँच समिति के निष्कर्षों वाले उस प्रस्ताव को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें हटाने की सिफारिश की गई थी। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह की पीठ ने कहा कि उनकी याचिका विचारणीय नहीं है क्योंकि वे प्रक्रिया में भाग लेने के बाद आंतरिक जाँच समिति के निष्कर्षों को चुनौती नहीं दे सकते हैं।
तत्कालीन दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा 14 मार्च को दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक आवास पर जली हुई नकदी मिलने के बाद जांच के दायरे में आ गए थे। मामले के बाद उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय वापस भेज दिया गया और आरोपों की आंतरिक जाँच शुरू की गई।