सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को गंगा नदी के किनारों और बाढ़ क्षेत्रों में अवैध निर्माणों के संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने और अतिक्रमण हटाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया है।
अदालत ने केंद्र सरकार से गंगा के पुनर्जीवन, संरक्षण और प्रबंधन संबंधी अधिसूचना के कार्यान्वयन और क्रियान्वयन के लिए अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी भी देने के लिए कहा है।
गंगा घाटी के कई राज्यों को नोटिस जारी करते हुए अदालत ने कहा है कि इस मुद्दे पर व्यक्तिगत मामलों से परे व्यापक जांच की आवश्यकता है। इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र से यह स्पष्टीकरण भी मांगा है कि अधिसूचना को प्रभावी ढंग से लागू करने और नदी के किनारों और बाढ़ के क्षेत्रों को अतिक्रमण से पूरी तरह मुक्त करने के लिए संबंधित प्राधिकरण अदालत से क्या निर्देश चाहता है। शीर्ष न्यायालय पटना के एक निवासी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के 30 जून, 2020 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील बाढ़ के क्षेत्रों पर अवैध निर्माणों और स्थायी अतिक्रमणों के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।