दिसम्बर 28, 2025 8:43 पूर्वाह्न

printer

सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली पहाड़ियों के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया

सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली पहाड़ियों की परिभाषा में हाल ही में हुए बदलाव से उत्पन्न चिंताओं का स्वतः संज्ञान लिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह की अवकाशकालीन पीठ कल इस मामले पर गौर करेगी।

सर्वोच्च न्यायालय का यह हस्तक्षेप अरावली पहाड़ियों की पुनर्परिभाषा को लेकर हुए जनविरोध के बाद आया है। पर्यावरण संगठनों और नागरिक समाज समूहों ने चेतावनी दी है कि परिभाषा में ढील देने से खनन और निर्माण गतिविधियों का खतरा बढ़ जायेगा।

यह विवाद दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में स्थित अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा में लंबे समय से चली आ रही विसंगतियों से उपजा है, जिसके कारण पहले नियामकीय खामियां पैदा हुईं और अवैध खनन को बढ़ावा मिला। इन मुद्दों को हल करने के लिए, सर्वोच्च न्यायालय ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया और इस वर्ष नवंबर में एक फैसला सुनाया जिसमें खनन गतिविधियों को विनियमित करने के लिए समिति की परिचालन परिभाषा को स्वीकार किया गया।

न्यायालय ने केंद्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील अरावली क्षेत्र में किसी भी नई खनन गतिविधि की अनुमति देने से पहले सतत खनन के लिए एक प्रबंधन योजना तैयार करने का भी निर्देश दिया था।

अरावली पहाड़ियां उत्तर-पश्चिमी भारत में मरुस्थलीकरण को रोकने, भूजल को संरक्षित करने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए जानी जाती हैं।