केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि सरकार ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्टार्टअप्स के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र को प्राथमिकता दी है। चेन्नई में आज दो दिन के राइज़ कॉन्क्लेव में अपने मुख्य भाषण में उन्होंने कहा कि देश के हर युवा और नागरिकों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को समझना और उनका इस्तेमाल करना तथा राष्ट्र-निर्माण का हिस्सा बनना ज़रूरी है।
तमिलनाडु के लिए सरकार द्वारा उठाए गए अलग-अलग कदमों के बारे में उन्होंने कहा कि मुद्रा योजना के ज़रिए 30 करोड़ युवाओं ने लाभ उठाया है। इस योजना में मुख्य रूप से 67 प्रतिशत महिलाएं थीं। उन्होंने कहा कि योजना के लाभार्थियों को 30 प्रतिशत से ज़्यादा बाजार संपर्क भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीयों की पेटेंट फाइलिंग छठे नंबर पर है और दो लाख से ज़्यादा लोगों ने अपने नवाचार का पेटेंट कराया है।
डॉ. सिंह ने बताया कि वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद्- सी एस आई आर ने विद्यार्थियों और नवोन्मेषकों को एक मंच दिया है। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि उन्हें प्रौद्योगिकी सहायात दी जा सकती है और वे बिज़नेस इनक्यूबेटर के तौर पर भी काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब भारत ऐसा अनुसंधान कर पाया है। इस अनुसंधान से हीमोफीलिया की समस्या में फ़ायदा होगा। उन्होंने कहा कि चंद्रयान, जीन थेरेपी जैसे प्रोजेक्ट इसलिए मुमकिन हो पाए क्योंकि तमिलनाडु राज्य में लैब्स मौजूद थीं। आज के कॉन्क्लेव में, सी एस आई आर ने कई विश्वविद्यालयों और शैक्षिक संस्थानों के साथ कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए।