सरकार ने भारत को वैश्विक जैव-औषधीय विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए बजट में बायोफार्मा शक्ति पहल का प्रस्ताव रखा है। शक्ति यानि ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा उन्नति की रणनीति पहल पर अगले पांच वर्ष में कुल 10 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इसका उद्देश्य जैविक और जैव-समान दवाओं के घरेलू उत्पादन के लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।
भारतीय दवा उद्योग मात्रा के हिसाब से वैश्विक स्तर पर तीसरे और मूल्य के हिसाब से 11वें स्थान पर है, जिसमें 3 हजार से अधिक कंपनियां और 10 हजार 500 विनिर्माण इकाइयां हैं।
आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025 में इस क्षेत्र का वार्षिक कारोबार चार लाख बहत्तर हज़ार करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें पिछले दशक में निर्यात 7 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर- सीएजीआर से बढ़ा है।
भारत जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा वैश्विक आपूर्तिकर्ता है, जो वैश्विक आपूर्ति में लगभग 20 प्रतिशत योगदान देता है। देश 60 चिकित्सीय श्रेणियों में लगभग 60 हजार जेनेरिक ब्रांडों का निर्माण करता है।