हिमाचल के मुख्यमंत्री सुक्खू के दावे बिल्कुल खोखले साबित हुए हैं कि सरकार वित्तीय संकट से नहीं जूझ रही है जबकि असली मायनों में सरकार का दीवालिया निकल चुका है।
मंगलवार को मीडिया को जारी बयान में जिला शिमला भाजपा अध्यक्ष , प्रेम ठाकुर ने कहा कि सरकार के पास अगस्त माह का वेतन सरकारी कर्मचारियों को पहली सितंबर को देने के लिए धनराशि नहीं है और अब वेतन पांच तारीख को देने का फैसला लिया है। इसी तरह पैंशन भोगियों को उनकी पैंशन पहली सितंबर की बजाए 10 सितंबर को देने का फैसला लिया गया है जिस से पैंशन भोगियों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार का उदाहरण प्रदेश की यह पहली सरकार में देखने को प्रथम बार मिल रहा है। सरकारी कर्मचारियों और पैंशन भोगियों को समय पर उनके द्वारा की गई मेहनत का फल नहीं दिया जा रहा है जिस से यह साफ हो रहा है कि सरकार दीवालिया हो चुकी है मगर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु दावा कर रहे हैं कि 2027 में हिमाचल देश का सबसे समृद्ध राज्य बनेगा यह खोखला दावा इसलिए भी साबित हो रहा है की विकास के सारे काम ठप्प पड़े हैं और कर्मचारी और पेंशनरों का भुगतान ठप्प हो गया है। एक और पेंशनरज और कर्मचारी डीए की किस्त और पेंशन का बकाया लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
दूसरी ओर इस सरकार ने कर्मचारियों का वेतन और पेंशनरों की पेंशन रोक कर उनके हितों पर कुठाराघात किया है। सभी पेंशनर्स अपने बुढ़ापे में अपने एरियर का बड़ी बेताबी से इंतजार कर रहे हैं । बुढ़ापे में अपने इलाज के लिए दवाइयां, गृह निर्माण बच्चों की शादी विवाह के लिए बैंकों से कर्ज उठा रहे हैं और दूसरी और इस सरकार ने पेंशन रोक कर उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय किया है।
उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया है कि इस सरकार को दिवालिया घोषित करके प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए ताकि कर्मचारियों और पेंशनरों को उनका वेतन पेंशन और अन्य भत्ते समय पर प्राप्त हो सके और लोग राहत की सांस ले सके