सर्वोच्च न्यायालय ने चल रहे लोकसभा चुनावों के लिए मतदान के प्रत्येक चरण के बाद निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर मतदान प्रतिशत के प्रमाणीकृत रिकॉर्ड का खुलासा करने से संबंधी किसी प्रकार के अन्तरिम फैसला सुनाने से इंकार कर दिया है ।
गर्मियों की छुट्टियों के बाद इस मामले की सुनवाई को स्थगित करते हुए, न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और एस.सी. शर्मा की पीठ ने कहा कि इस स्तर पर अंतरिम निर्देश पारित करना याचिकाओं में अंतिम राहत देने के समान होगा। न्यायाधीशों की पीठ ने यह भी कहा कि चुनाव प्रक्रिया के बाद इस राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
निर्वाचन आयोग ने शीर्ष अदालत को बताया कि सभी मतदान केंद्रों पर दर्ज वोटों की स्कैन की गई सुपाठ्य प्रतियों का खुलासा करने से चुनावी तंत्र में “अराजकता” पैदा हो जाएगी।
निर्वाचन आयोग ने अपने हलफनामे में कहा कि चुनाव अवधि के समापन पर किसी प्रकार का बदलाव निर्वाचन प्रक्रिया में भ्रम और परेशानी का कारण बनेगा। आयोग ने बताया कि शेष दो चरणों में तैनात होने वाले मतदान कर्मियों को पर्याप्त प्रशिक्षण देने का समय नहीं है।