संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। पहले स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, तो केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 में और संशोधन करना है। उन्होंने मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2025 को तत्काल लागू करने के कारणों को बताते हुए विस्तृत वक्तव्य भी प्रस्तुत किया। पीठासीन अधिकारी संध्या रे ने शून्यकाल चलाने का प्रयास किया, लेकिन विपक्षी सदस्यों ने विशेष गहन पुनरीक्षण मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी।
उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और उन्होंने विपक्षी सांसदों से सदन को चलने देने का आग्रह किया। सुश्री रे ने यह भी कहा कि सदन में विपक्ष का आचरण उचित नहीं है। हंगामे के बीच, पीठासीन अधिकारी ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले लोकसभा की कार्यवाही 11 बजे शुरू होने पर अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल चलाने का प्रयास किया लेकिन विपक्षी सदस्य बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण पर बहस की मांग करते हुए नारे लगाने लगे। अध्यक्ष ने हंगामा कर रहे सदस्यों से बार-बार अपनी सीट पर जाने और संसदीय नियमों तथा लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करने की अपील की। शोरगुल के बीच आवासन और शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल ने स्मार्ट सिटी मिशन से संबंधित प्रश्न का उत्तर दिया। हंगामा जारी रहने पर अध्यक्ष ने कार्यवाही बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
राज्यसभा में भी ऐसा ही दृश्य था। सुबह 11 बजे सदन की बैठक शुरू होने पर उपसभापति हरिवंश ने कहा कि उन्हें अनेक राजनीतिक दलों से विभिन्न मुद्दों पर 25 स्थगन नोटिस मिले हैं लेकिन नियमों का हवाला देते हुए इन्हें खारिज कर दिया गया है। उन्होंने विपक्षी दलों से अपनी सीट पर वापस आने और सदन को चलने देने की अपील की। उपसभापति ने कहा कि राज्यसभा की कार्यवाही में लगातार बाधा से 51 से अधिक घंटे बर्बाद हो गए हैं। उन्होंने कहा कि शून्यकाल और प्रश्नकाल सदस्यों के लिए हैं। उपसभापति ने सदस्यों से अनुरोध किया कि सदन को चलने दें लेकिन हंगामा जारी रहने पर श्री हरिवंश ने सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।