सर्वोच्च न्यायालय की अवकाशकालीन पीठ ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में अपनी अंतरिम जमानत सात दिन बढ़ाने की मांग करने वाली याचिका पर त्वरित सुनवाई करने से इन्कार कर दिया। न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि वे किसी अन्य न्यायपीठ के समक्ष दायर आवेदन में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। अवकाश पीठ ने श्री केजरीवाल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी से कहा कि वे इस मामले में सुनवाई के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष अपील कर सकते हैं।
उधर, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने धनशोधन निवारण अधिनियम-पीएमएलए के तहत प्रवर्तन निदेशालय द्वारा श्री केजरीवाल की गिरफ्तारी को रद्द करने की उनकी याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इससे पहले पीठ ने श्री केजरीवाल को पीएमएलए की धारा 45 के तहत वैधानिक जमानत के लिए आवेदन करने की अनुमति दी थी।