मार्च 5, 2026 8:56 अपराह्न

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष तेज: सशस्त्र समूह हिज़्बुल्लाह भी ईरान के साथ हमलों में शामिल

कर्ई देशों के शामिल होने के साथ पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष तेजी से बढ़ गया है। अमरीका और इस्राएल ईरान पर हवाई हमले कर रहे हैं और तेहरान मिसाइलों और ड्रोन से जवाबी कार्रवाई कर रहा है। ईरान समर्थित सशस्त्र समूह हिज़्बुल्लाह भी ईरान के साथ हमलों में शामिल हो गया है। क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के लिए इसे खतरा बताते हुए कई देश चिंता व्यक्त करने के साथ स्थिति को शांत करने का आह्वान कर रहे हैं।

अज़रबैजान ने आज नखचिवान शहर और हवाई अड्डे पर ईरान के ड्रोन हमले की कड़ी आलोचना की है। इसमें दो नागरिक घायल हो गए। ईरान ने इन हमलों से इंकार किया है।

कतर ने भी ईरान पर मिसाइल हमले का आरोप लगाया है। सऊदी अरब ने कहा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई ड्रोन नष्ट कर दिये हैं।

ब्रिटेन प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कतर में चार अतिरिक्त लड़ाकू विमानों की तैनाती की घोषणा की है। लंदन में आज श्री स्टारमर ने कहा कि ये विमान कतर में पहले से तैनात ब्रिटिश बलों में शामिल होंगे, जिससे क्षेत्र में ब्रिटेन की रक्षात्मक स्थिति मजबूत होगी।

संयुक्त अरब अमीरात ने भी दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों और 131 ड्रोन को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया है।

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा है कि ईरान ने इस्राएल पर खुर्रम शहर-4 मिसाइल से हमला किया। ईरान ने बहरीन, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात पर भी हमले के दावे किये।

आज सुबह ईरान ने इस्राएली और अमरीकी ठिकानों पर नए हमले किए। ईरान ने कहा है कि हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत को नष्ट करने पर अमरीका को पछतावा होगा। अमरीकी नौसेना ने मंगलवार रात हिंद महासागर में, ईरानी युद्धपोत आईरिस देना पर हमला किया था। इसमें 87 ईरानी नाविक मारे गए।

ईरान का एक अन्य जहाज, आईरिस बुशहर इस समय श्रीलंका के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र के पास मौजूद है। जहाज ने श्रीलंका के बंदरगाह पर डॉक रुकने की अनुमति मांगी है। श्रीलंका सरकार इस अनुरोध पर विचार कर रही है।

इस बीच, ईरान ने इस्राएल के दिमोना परमाणु स्थल को निशाना बनाने की भी धमकी दी है।    दूसरी ओर, इस्राएली सेना ने लेबनान में ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह के कई कमांड केंद्रों पर लक्षित हमले किए। अमरीका और इस्राएल ने शनिवार को ईरान के नेतृत्व को निशाना बनाते हुए सैन्य अभियान शुरू किया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के साथ-साथ उसके मिसाइल भंडार और परमाणु कार्यक्रम को भी नष्ट कर दिया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस युद्ध में अब तक ईरान में एक हज़ार से अधिक, लेबनान में 70 से अधिक और इस्राएल में लगभग एक दर्जन लोग मारे जा चुके हैं। इस संघर्ष के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हो गई है।

इसे देखते हुए, फ्रांस, इटली और ग्रीस, साइप्रस तथा पूर्वी भूमध्य सागर में सैन्य तैनाती पर सहमत हो गए हैं। तीनों देश लाल सागर में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे। एक फ्रांसीसी राजनयिक ने कहा कि इस निर्णय की घोषणा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी और ग्रीस के प्रधानमंत्री क्यारियाकोस मित्सोटाकिस से बातचीत के बाद की गई। इस सप्ताह के शुरु में, राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा था कि स्वेज नहर और लाल सागर में तनाव है और फ्रांस इन समुद्री मार्गों के माध्यम से यातायात सुरक्षित करने के लिए एक गठबंधन बनाने की पहल करेगा।

इस बीच, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि रूस अमरीका और इस्राएल के ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। श्री लावरोव ने मॉस्को में राजदूतों की गोलमेज बैठक में ये बात कही। उन्होंने कहा कि रूस सैन्य तनाव को रोकने के लिए क्षेत्रीय देशों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासभा सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ बातचीत जारी रखेगा।