संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही विपक्ष के हंगामें के कारण दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्षी दल बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहे थे।
इससे पहले सुबह 11 बजे, लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर, कांग्रेस, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल नारेबाजी करते हुए सदन के बीचो-बीच आ गए। हंगामे के बीच, अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल चलाने का प्रयास किया। श्री बिरला ने कहा कि प्रदर्शनकारी सदस्य पूर्व नियोजित तरीके से सदन की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सदस्यों का आचरण संसदीय लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। हंगामे के कारण लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले, सदन में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन, पूर्व सांसद तिलकधारी प्रसाद सिंह और राम रति बिंद को श्रद्धांजलि दी गई।
वहीं, राज्यसभा में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद, विपक्षी दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण पर चर्चा की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विपक्षी सदस्यों ने सदन के अंदर केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल- सी.आई.एस.एफ. जवानों की तैनाती का मुद्दा उठाया। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उन्होंने विपक्षी दलों की ओर से उपसभापति को एक पत्र लिखा है। उन्होंने विपक्षी सदस्यों का सदन के बीचो बीच विरोध के समय सी.आई.एस.एफ. कर्मियों की मौजूदगी पर प्रश्न उठाया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि यह रिकॉर्ड में स्पष्ट है कि केवल मार्शल ही सदन में प्रवेश कर सकते हैं। उन्होंने श्री खड़गे पर सदन को गुमराह करने और झूठे तथ्य पेश करने का आरोप लगाया।
हंगामे के बीच, सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा, सदन की कार्यवाही को बाधित करना संसदीय नियमों के खिलाफ है। उपसभापति हरिवंश ने भी लगातार व्यवधान पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ सदस्य जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, प्रश्नकाल और शून्यकाल सार्वजनिक महत्व के मुद्दे को उठाने और सरकार को