विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि विश्व इस समय उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए हैं जो वैश्विक व्यवस्था को नया रूप दे सकते हैं। उन्होंने वीमर प्रारूप की बैठक में शामिल होने के लिए निमंत्रण मिलने की सराहना की, जिसमें फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड के विदेश मंत्रियों ने भाग लिया। श्री जयशंकर ने कहा कि चर्चा मुख्य रूप से भारत-यूरोपीय संघ संबंधों, हिंद-प्रशांत क्षेत्र और यूक्रेन संघर्ष पर केंद्रित थी। उन्होंने बताया कि आज भारत के यूरोपीय संघ और यूरोप के साथ संबंधों और प्रगाढ़ होने की सम्भावना है। विदेश मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें अपार क्षमता मौजूद है और उन्हें तलाशने की आवश्यकता है।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि विश्व बहुध्रुवीय दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे कारक और घटनाएं जो इसे अधिक अस्थिर और अनिश्चित बनाती हैं जो समान विचारधारा, एकमत और साझा विचार वाले देशों के बीच गहन सहयोग की आवश्यकता को दर्शाती हैं।