मार्च 12, 2026 9:58 अपराह्न

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लोकसभा में वर्ष 2025-26 की पूरक अनुदान मांगों पर चर्चा शुरू

लोकसभा में आज वर्ष 2025-2026 की पूरक अनुदान मांगों पर चर्चा शुरू हुई। इसमें 61 अनुदान मांगे शामिल हैं। सरकार ने दो लाख 81 हजार करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त व्यय को मंजूरी देने की मांग सदन से की है।

    चर्चा की शुरुआत करते हुए भारतीय जनता पार्टी के जगदंबिका पाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण विश्व भर में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें 88 डॉलर से बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल हो गई है, जिसका सीधा प्रभाव उर्वरक, गैस और परिवहन पर पड़ रहा है। श्री पाल ने कहा कि यह पूरक अनुदान मांगें मौजूदा संकट को ध्‍यान में रखकर की गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार विकास कार्यों में तेजी ला रही है और किसानों को उर्वरक पर सब्सिडी भी प्रदान कर रही है।

    समाजवादी पार्टी के राम शिरोमणि वर्मा ने बेरोजगारी का मुद्दा उठाया और किसानों की आय बढ़ाने की मांग की। श्री वर्मा ने कहा कि सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि को पांच करोड़ रुपये से बढ़ाकर 25 करोड़ रुपये प्रति वर्ष किया जाए।

    डीएमके पार्टी के गणपति राजकुमार ने देश में एलपीजी सिलेंडरों की कमी का मुद्दा उठाया। तेलुगु देसम पार्टी के दग्गुमल्ला प्रसाद राव ने कहा कि कृषि क्षेत्र अर्थव्यवस्था को गति दे रहा है। श्री राव ने बताया कि 19 हजार करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी किसानों के लिए सहायक होगी।

    राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की सुप्रिया सुले ने कहा कि विश्‍व एक वैश्विक संकट से जूझ रहा है। उन्होंने सरकार से पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा करने के लिए तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष व्यापक हित में काम करने के लिए तत्पर है। कांग्रेस के प्रद्युत बोरदोलोई ने असम में एनआरसी परियोजना का उदाहरण देते हुए दावा किया कि पूरी प्रक्रिया में करोड़ों रुपये की सरकारी धनराशि बर्बाद हुई है।

    आर एस पी के एन.के. प्रेमचंद्रन ने कहा कि अनुदान के लिए भारी भरकम पूरक मांगों से बचने के लिए वित्तीय नियमों और लोक लेखा समिति के निर्देशों का कड़ाई से पालन करना आवश्यक है।

    कांग्रेस सदस्‍य के. सुरेश ने कहा कि देश भर के आम नागरिकों द्वारा अनुभव की जा रही वास्तविकताएं गंभीर चिंता पैदा करती हैं कि क्या सार्वजनिक व्यय किसानों, युवाओं और हाशिए पर खड़े समुदायों की जरूरतों को पूरा किया जा रहा है।

    चर्चा अभी जारी है। बाद में सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल इसका जवाब देंगी।