वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकार रोजगार सृजन और विकास को गति देने के लिए श्रम प्रधान क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देते हुए देश में मजबूत बुनियादी ढांचे के निर्माण को बढ़ावा दे रही है। लोकसभा में केंद्रीय बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए, सुश्री सीतारमण ने कहा कि इस वर्ष के बजट में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय के लिए 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, जो सकल घरेलू उत्पाद का तीन दशमलव एक प्रतिशत है और 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 11 दशमलव पांच प्रतिशत अधिक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए धन खर्च किया जाएगा।
विपक्ष के इस आरोप का खंडन करते हुए कि बजट में रोजगार सृजन के बारे में कुछ नहीं कहा गया है, वित्त मंत्री ने कहा कि पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र देश में चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देंगे। उन्होंने कहा कि एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स क्षेत्र भी आने वाले वर्षों में देश में रोजगार के अवसर पैदा करेगा। उन्होंने राज्यों को कर हस्तांतरण में कमी के विपक्ष के आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा कि इस वर्ष राज्यों को 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक हस्तांतरित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार ने विभाज्य निधि का 41 प्रतिशत राज्यों को हस्तांतरित कर दिया है और किसी भी राज्य का हिस्सा कम नहीं किया गया है। ऋण प्रवाह के संबंध में वित्त मंत्री ने बताया कि एमएसएमई सहित उद्योगों के लिए धन की कोई कमी नहीं है। उपकर और अधिभारों के संग्रह के संबंध में उन्होंने दोहराया कि ये, केंद्र द्वारा विशिष्ट उद्देश्यों के लिए एकत्र किए जाते हैं, जैसे स्वास्थ्य उपकर, शिक्षा उपकर और सड़क उपकर। वित्त मंत्री ने कहा कि एकत्रित राशि राज्यों में खर्च की जा रही है।
उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में महंगाई दर में कमी आई है, जो यूपीए सरकार के दौरान दो अंकों में थी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश के हित में काम कर रही है। उन्होंने कांग्रेस पर अपने शासनकाल में किसानों के हितों से समझौता करने और विश्व व्यापार संगठन के सामने आत्मसमर्पण करने का आरोप लगाया। श्रीमती सीतारामन ने शर्म अल-शेख में दिए गए संयुक्त बयान का भी जिक्र किया, जिसमें पिछली सरकार पर पाकिस्तान के साथ संबंधों में संप्रभुता और सुरक्षा पर भारत की स्थिति को कमजोर करने का आरोप लगाया गया था।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि केंद्रीय बजट में कुछ भी ठोस नहीं है। उन्होंने कहा कि बजट कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर केंद्रित है और आशंका जताई कि इंजीनियरिंग और आईटी क्षेत्र में एआई के कारण कई नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी। गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी सवाल उठाते हुए सरकार पर युवाओं और किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता बराबरी का नहीं, बल्कि दबाव का है।
उन्होंने कहा कि भारत ने शुल्क के मामले में झुककर देश का डेटा सौंप दिया है और डिजिटल व्यापार नियमों पर अपना नियंत्रण छोड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर भी समझौता किया है।
श्री गांधी की टिप्पणियों का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस ने 2014 तक देश को कमजोर किया और अब वह देश की प्रगति से नाखुश है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी भारत के अब तक के सबसे सशक्त प्रधानमंत्री हैं।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने चर्चा में भाग लेते हुए दावा किया कि देश की प्रति व्यक्ति आय विश्व में सबसे कम है। उन्होंने कहा कि लगभग 34 प्रतिशत भारतीय प्रतिदिन 100 रुपये से कम पर जीवन यापन करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि युवा बेरोजगारी लगभग 15 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिसमें शहरी युवाओं का बेरोजगारी प्रतिशत 18 प्रतिशत से अधिक है। आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने कहा कि इस वर्ष के बजट में दूरदर्शिता और दिशा का अभाव है।
उन्होंने कहा कि बजट प्रस्ताव विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा पर अपने रुख से समझौता किया है। शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि इस वर्ष के बजट में पंजाब के विकास को गति देने के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के इंद्र हांग सुब्बा ने कहा कि बजट में समाज के सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी क्षेत्रों को मजबूत करना आवश्यक है। श्री सुब्बा ने आगे कहा कि बजट में उद्योग-आधारित अनुसंधान के लिए किया गया प्रावधान स्वागत योग्य कदम है। आम आदमी पार्टी के डॉ. राज कुमार छब्बेवाल ने आरोप लगाया कि केंद्रीय बजट में देश की जनता के लिए कुछ भी ठोस नहीं है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए बजट में आवंटन कम कर दिया गया है। भाजपा के सुधीर गुप्ता ने केंद्रीय बजट की सराहना करते हुए कहा कि यह 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि यूपीए शासन के दौरान, 2013-14 में केंद्रीय बजट का आकार 16 लाख करोड़ रुपये था, जबकि एनडीए शासन में यह 2026-27 में 53 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय, जो 2014 में केवल 2 लाख करोड़ रुपये था, वर्तमान सरकार के दौरान 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। भाजपा के अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि यह बजट गरीबों के कल्याण पर केंद्रित है, महिलाओं को सशक्त बनाता है और किसानों तथा युवाओं को पर्याप्त अवसर प्रदान करता है। शिवसेना के श्रीकांत शिंदे ने बजट को नए भारत का प्रतिबिंब बताया, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर विशेष ध्यान दिया गया है।
एलजेपी के अरुण भारती ने केंद्रीय बजट को राष्ट्र के विकास का बजट बताया। उन्होंने इसे दूरदर्शी और समावेशी बजट बताते हुए कहा कि यह 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की नींव रखेगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करता है और विनिर्माण को बढ़ावा देता है।
श्री भारती ने कहा कि केंद्र ने बिहार को प्राथमिकता दी है और बताया कि राज्य को दी जाने वाली वित्तीय सहायता, जो 2004 से 2014 के बीच लगभग तीन लाख करोड़ रुपये थी, उसे 2014 से 2024 के दौरान तीन गुना बढ़ाकर नौ लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।