फ़रवरी 12, 2026 9:36 अपराह्न

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लोकसभा में औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक पारित

लोकसभा ने आज औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया। यह विधेयक औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 में संशोधन करता है। संशोधन का उद्देश्य तीन कानूनों, ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926, औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 और औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947, जिनकी जगह औद्योगिक संबंध संहिता 2020 ने ले ली है, की निरंतरता को लेकर भविष्य में होने वाली किसी भी जटिलता से बचना है।

चर्चा का उत्तर देते हुए श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि 17 राष्ट्रीय श्रम संगठनों ने कहा है कि श्रम संहिता श्रमिकों के हित में लागू की गई है। उन्होंने कहा कि कुछ ही संगठनों ने इस कानून का विरोध किया है।

श्री मांडविया ने कहा कि श्रम संहिता वैधानिक समर्थन के साथ न्यूनतम मजदूरी लागू करती है और किसी भी राज्य को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम मजदूरी तय करने की अनुमति नहीं होगी। श्री मांडविया ने कहा कि संहिता पुरुषों और महिलाओं के लिए समान वेतन की गारंटी देती है और श्रमिकों को समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करती है।

उन्‍होंने कहा कि श्रम संहिता के अंतर्गत 40 वर्ष से अधिक आयु के सभी श्रमिकों को साल में एक बार अनिवार्य स्वास्थ्य जांच करानी होगी। एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए श्री मंडाविया ने कहा कि श्रम कानून तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के शहरों में रोजगार के अवसर पैदा करने में सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश में सामाजिक सुरक्षा का दायरा 19 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत हो गया है।

इससे पहले, चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के कोडिकुन्निल सुरेश ने कहा कि औद्योगिक संबंध संहिता संशोधन विधेयक 2026 से सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं में बेरोजगारी दर बहुत अधिक हैं और रोजगार संरक्षण के प्रावधानों को मजबूत करने के बजाय, सरकार इसे कमजोर कर रही है।

वहीं भाजपा सासंद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा कि यह विधेयक श्रमिको के हितों की रक्षा करता है और उद्योगों में ईज ऑफ डूईंग बिजनेस को बढ़ावा देता है। 

समाजवादी पार्टी के अफजल अंसारी ने सरकार पर श्रमिको के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी- शरद चंद्र पवार गुट की सुप्रिया सुले ने सवाल उठाया कि क्या संविदा श्रमिकों को नए औद्योगिक संबंध संहिता विधेयक के दायरे में लाया गया है।

उन्होंने कहा कि भारत में 42 प्रतिशत श्रमिक संविदा पर काम करते हैं। सीपीआई- एमएल के सुदामा प्रसाद ने कहा कि यह नई संहिता कुछ पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ई.टी. मोहम्मद बशीर ने कहा कि यह विधेयक श्रमिकों के अधिकारों का हनन करता है।