लोकसभा अध्यक्ष को हटाने की विपक्ष की मांग का प्रस्ताव आज सदन में ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया।
चर्चा का उत्तर देते हुए भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष का लोकसभा अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लगभग चार दशक के बाद लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। श्री शाह ने कहा कि यह संसदीय राजनीति और सदन दोनों के लिए खेदजनक है। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि सदन का है। श्री शाह ने कहा कि भाजपा और एनडीए ने कभी भी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया, क्योंकि पार्टी का मानना है कि अध्यक्ष की निष्ठा पर कोई संदेह नहीं है।
गृह मंत्री ने कहा कि सदन की कार्यवाही आपसी विश्वास और नियमों के आधार पर संचालित होती है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष एक निष्पक्ष संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं, जो सत्ताधारी दल और विपक्ष दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। श्री शाह ने कहा कि लोकसभा ने अध्यक्ष को सत्र संचालित करने के लिए विशिष्ट नियम बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सदस्यों से अपेक्षा की जाती है कि वे नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार बोलें और भाग लें। गृह मंत्री ने कहा कि लोकसभा के नियमों के अंतर्गत अध्यक्ष के निर्णय अंतिम माने जाते हैं, लेकिन विपक्ष ने अध्यक्ष की निष्ठा पर संदेह किया है।
श्री शाह ने कहा कि आज दुनिया देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की शक्ति और प्रतिष्ठा को पहचानती है। उन्होंने कहा कि सदन के संरक्षक पर आरोप लगाए जाने से देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।
इससे पहले, भाजपा के रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि कुछ विपक्षी दलों के नेताओं के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए यह प्रस्ताव लाया गया है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को विदेश में बोलते समय अपने शब्दों के प्रति सावधान रहना चाहिए। श्री प्रसाद ने आरोप लगाया कि श्री गांधी भारत के संविधान, संसद और निर्वाचन आयोग के खिलाफ टिप्पणी करते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष का नेता सदन का हिस्सा है, लेकिन विपक्ष के नेता का आचरण भी उतना ही जिम्मेदार होता है। श्री प्रसाद ने कहा कि पिछले 72 वर्षों में लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस केवल दो बार हुई है।
सदन में प्रसाद की टिप्पणियों का उत्तर देते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें कई बार सदन में बोलने से रोका गया है। उन्होंने कहा कि सदन किसी एक दल का नहीं, बल्कि पूरे देश का है।
कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि यह प्रस्ताव लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांत से संबंधित है और देश में संसदीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी विपक्ष का कोई सदस्य बोलने के लिए खड़ा होता है, तो उसे माइक नहीं दिया जाता।
समाजवादी पार्टी के आनंद भदौरिया ने कहा कि विपक्षी दलों ने लोकसभा की गरिमा की रक्षा के लिए यह प्रस्ताव लाया है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों को बोलने का समय दिया, लेकिन साथ ही श्री बिरला ने सदन में विपक्ष के नेता की आवाज दबाने की कोशिश की।
भाजपा के अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि चर्चा के दौरान अधिकांश सांसदों ने ओम बिरला की प्रशंसा की और स्वीकार किया कि उन्होंने उन्हें बोलने का अवसर दिया गया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के नेताओं, विशेषकर कांग्रेस के नेताओं ने अध्यक्ष के कार्यालय में जाकर उनके साथ अनुचित व्यवहार किया।
जनता दल सेक्युलर के मल्लेश बाबू ने कहा कि यह प्रस्ताव स्पष्ट रूप से राजनीतिक प्रकृति का है। उन्होंने सदन में विरोध कर रहे सांसदों के आचरण पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि लोकसभा अध्यक्ष की ओर कागज फेंकना और अध्यक्ष पर आरोप लगाना सदन की मर्यादा के विरुद्ध है।
कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने कल यह प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने आरोप लगाया है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को सदन में अपने विचार रखने से रोका और विपक्षी महिला सांसदों पर निराधार आरोप लगाए। श्री जावेद ने यह भी आरोप लगाया कि श्री बिरला सदन के सभी वर्गों का विश्वास हासिल करने के लिए आवश्यक निष्पक्षता बनाए रखने में विफल रहे।
प्रस्ताव खारिज करने के बाद, लोकसभा दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। सदन की बैठक कल सुबह 11 बजे फिर होगी।