लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है। दोपहर 12 बजे के स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही फिर से शुरू होने पर कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने यह प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को सदन में बोलने नहीं दिया और विपक्षी महिला सांसदों पर निराधार आरोप भी लगाए। श्री जावेद ने कहा कि श्री बिरला सदन में सभी सांसदों का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक निष्पक्ष रवैया अपनाने में विफल रहे।
चर्चा में भाग लेते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि अध्यक्ष ओम बिरला हमेशा निष्पक्ष रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले महीने बजट सत्र की शुरूआत के अवसर पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में खड़े होकर कहा था कि उन्हें बोलने के लिए किसी की अनुमति नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के किसी भी सदस्य ने कभी भी कागज फाड़कर अध्यक्ष पर नहीं फेंके हैं, न ही उन्होंने ऐसा कुछ किया है जिससे सदन की गरिमा को ठेस पहुंची हो। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि विपक्षी दल सिर्फ अपना राजनीतिक हित साधने के लिए अध्यक्ष के खिलाफ यह प्रस्ताव लेकर आए हैं।
श्री रिजिजू ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के रूप में श्री बिरला के कार्यकाल में कई सुधार हुए हैं और शून्यकाल के दौरान सबसे अधिक मुद्दे उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि श्री बिरला के नेतृत्व में संसद को पूरी तरह से डिजिटल और कागज रहित बनाया गया है। श्री बिरला के नेतृत्व में 18वीं लोकसभा में एनडीए सांसदों को 321 पूरक प्रश्न दिए गए, जबकि विपक्षी दलों को 364 प्रश्न दिए गए। उन्होंने कहा कि सरकार में सांसदों की संख्या अधिक होने के बावजूद श्री बिरला ने विपक्षी दलों को हमेशा बोलने का अधिक अवसर दिया। श्री रिजिजू ने कहा कि इसके अलावा, शून्यकाल के दौरान कुल 1835 मुद्दे उठाए गए, जिनमें से 56 प्रतिशत विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दे ही रहे।
इससे पहले, चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के गौरव गोगोई ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर भाषण देते समय सदन में विपक्ष के नेता को अध्यक्ष ने बार-बार टोका। उन्होंने आरोप लगाया कि अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातर्ण व्यवहार किया। श्री गोगोई ने कहा कि यह प्रस्ताव अध्यक्ष के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि सदन की गरिमा को बचाए रखने के लिए लाया गया है।
उन्होंने कहा कि अध्यक्ष सरकार की बात कहने के लिए नहीं है, बल्कि पूरे सदन के अधिकारों के संरक्षक हैं। समाजवादी पार्टी के राजीव राय ने कहा कि सरकार ने अध्यक्ष के पद को कमजोर किया है, उपाध्यक्ष पद के लिए भी कोई नियुक्ति नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष का पद संवैधानिक है, राजनीतिक नहीं। तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ने लोकसभा अध्यक्ष के रूप में ओम बिरला के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में विपक्षी सांसदों को सबसे अधिक संख्या में निलंबित किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि चर्चा के दौरान विपक्ष के माइक जानबूझकर बंद किए गए और महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्षी सांसदों के स्थगन नोटिसों को स्वीकार नहीं किया। प्रस्ताव पर चर्चा जारी है।
News On AIR | मार्च 10, 2026 4:41 अपराह्न
लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू