लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा पुनः शुरू हो गई है। लोकसभा में चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि विपक्ष ने यह प्रस्ताव कुछ विपक्षी दलों के नेताओं के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए पेश किया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी को विदेश में बोलते समय अपने शब्दों के प्रति सजग रहना चाहिए। श्री प्रसाद ने आरोप लगाया कि श्री राहुल गांधी भारत के संविधान, संसद और निर्वाचन आयोग के खिलाफ टिप्पणियां करते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष का नेता सदन का हिस्सा है, इसलिए उनका आचरण भी उतना ही जिम्मेदार होता है। श्री प्रसाद ने कहा कि पिछले 72 वर्षों में अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पर केवल दो बार बहस हुई है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष का पद अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें सदन में कई बार बोलने से रोका गया। उन्होंने कहा कि सदन किसी एक दल का नहीं बल्कि पूरे देश का है। कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि यह प्रस्ताव लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांत से संबंधित है और देश में संसदीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी विपक्ष का कोई सदस्य बोलने के लिए खड़ा होता है, तो उसे माइक नहीं दिया जाता, जबकि बोलने का यही एकमात्र माध्यम है। उन्होंने कहा कि संसद बहस और चर्चा का मंच है, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष विपक्ष को देश के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने का अवसर नहीं देते। समाजवादी पार्टी के आनंद भदौरिया ने कहा कि विपक्षी दल पद की गरिमा की रक्षा के लिए यह प्रस्ताव लाए हैं। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष ने विपक्ष के सदस्यों को बोलने का समय तो दिया है, लेकिन विपक्ष के नेता की आवाज दबाने की कोशिश की है।
कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने कल यह प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने आरोप लगाया है कि अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को सदन में अपने विचार रखने से रोका और विपक्षी महिला सांसदों पर निराधार आरोप लगाए। श्री जावेद ने आरोप लगाया कि श्री बिरला सदन के सभी वर्गों का विश्वास हासिल करने में विफल रहे हैं।