जनवरी 17, 2026 7:18 पूर्वाह्न

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लोकतांत्रिक संस्थाएं तभी मजबूत बनी रह सकती हैं जब वे पारदर्शी, समावेशी, उत्तरदायी और जनता के प्रति जवाबदेह हों: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं तभी मजबूत और प्रासंगिक बनी रह सकती हैं जब वे पारदर्शी, समावेशी, उत्तरदायी और जनता के प्रति जवाबदेह हों। श्री बिरला ने यह बात राष्‍ट्रमंडल देशों की संसद के अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के समापन भाषण में कही। अध्यक्ष ने सभी प्रतिनिधिमंडलों की सक्रिय भागीदारी, उत्साह और रचनात्मक भावना की सराहना की, और कहा कि इससे सम्मेलन सार्थक और यादगार बन सका। उन्होंने कहा कि चर्चाओं से यह बात स्पष्ट होती है कि संसदों को अधिक जन-केंद्रित, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए सामूहिक चिंतन के लिए एक अनूठा मंच आज भी प्रासंगिक है।
 
लोकसभा अध्यक्ष ने 56 वर्ष पूर्व इस मंच की स्थापना के पीछे की परिकल्पना को याद करते हुए कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य राष्ट्रमंडल के लोकतांत्रिक विधानमंडलों के बीच निरंतर संवाद सुनिश्चित करना और संसदीय दक्षता तथा जवाबदेही बढ़ाने के नए तरीके खोजना था।
 
इस वर्ष यह सम्मेलन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। समापन सत्र में उन्होंने 29वें राष्‍ट्रमंडल देशों की संसद के अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन की अध्‍यक्षता ब्रिटेन के सदन ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष सर लिंडसे होयल को सौंपी, बाद में श्री बिरला ने संसद भवन परिसर में आयोजित एक उच्च तकनीक मल्टीमीडिया प्रदर्शनी – ‘भारत ऑन द मूव’ का भी दौरा किया, जिसमें भारत की समृद्ध लोकतांत्रिक विरासत और विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में इसके विकास पथ को प्रदर्शित किया गया था। 
 
इससे पहले दिन में, विशेष पूर्ण सत्र की अध्यक्षता करते हुए, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आधुनिक लोकतंत्र अभूतपूर्व अवसरों और जटिल, बहुआयामी चुनौतियों दोनों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पीठासीन अधिकारियों का सर्वोपरि कर्तव्य संवैधानिक मूल्यों पर अडिग रहते हुए लोकतांत्रिक संस्थानों को समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर रूप से ढालना है। 
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