देश आज भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत को संरक्षित करने के लिए 11वां राष्ट्रीय हथकरघा मना रहा है। सात अगस्त 1905 को शुरू हुए ऐतिहासिक स्वदेशी आंदोलन की भावना को आगे बढाने के लिए यह दिवस मनाया जा रहा है। इस अभियान में मुख्य रूप से ब्रिटिश सरकार के प्रतिकार के रूप में स्वदेशी उद्योंगों, विशेष रूप से हथकरघा उद्योग को बढावा दिया गया।
केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने आज नई दिल्ली में संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार-2025 प्रदान किए। इन पुरस्कारों का उद्देश्य इस क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले बुनकरों, कर्मियों और उत्पादक कंपनियों के प्रयासों को सम्मान प्रदान करना है।
11वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर श्री सिंह ने कहा कि वर्तमान में दुनियाभर में गुणवत्तार्पूण वस्त्रों की मांग है और भारतीय हथकरघा उद्योग इस आवश्यकता को पूरा कर रहा है। श्री सिंह ने हथकरघा उत्पादों को विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कपडा मंत्रालय देश के बुनकरों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है।
इस अवसर पर बोलते हुए, कपडा राज्य मंत्री पाबित्रा मार्गेरिटा ने कहा कि ई-कॉमर्स कम्पनियों के एकीकरण से बुनकरों को व्यापक बाज़ार पहुंच मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि जीआई टैग वाले उत्पादों और हैंडलूम मार्क तथा हैंडलूम इंडिया ब्रांड के साथ सरकार प्रामाणिकता, गुणवत्ता और पर्यावरण अनुकूल शिल्प कौशल सुनिश्चित कर रही है।