राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि संथाली भाषा की ओल चिकी लिपि के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। नई दिल्ली में ओल चिकी लिपि के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ओल चिकी संथाली समुदाय का सशक्त परिचय है। उन्होंने कहा कि यह संथाली समुदाय में एकता स्थापित करने का भी एक साधन है।
राष्ट्रपति ने कहा कि ओल चिकी लिपि का प्रसार न केवल देश में बल्कि विश्व स्तर पर भी हो रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा ओल चिकी लिपि में आयोजित करने के निर्णय की सराहना की। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि अन्य भारतीय भाषाओं की तरह साहित्य अकादमी भी संथाली लेखकों को सम्मानित कर रही है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान संथाली भाषा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
सरकार ने ओल चिकी लिपि के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक स्मारक सिक्का और एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया। ओल चिकी लिपि को 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मू ने विशेष रूप से संथाली भाषा के लिए विकसित किया था, जिसे बाद में 2003 में भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया। इस लिपि में 30 अक्षर हैं जो संथाली ध्वनियों का सटीक प्रतिनिधित्व करते हैं। ओल चिकी संथाली भाषा की आधिकारिक लिपि है, जो भारत की प्रमुख जनजातीय भाषाओं में से एक है और झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और बिहार में व्यापक रूप से बोली जाती है।