राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने निजी क्षेत्र, परोपकारी संस्थाओं, गैर सरकारी संगठनों और अन्य हितधारकों से भारत को स्वास्थ्य सेवा के केंद्र के रूप में विकसित करने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया है। मुंबई के लोक भवन में पी. डी. हिंदुजा अस्पताल की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर उन्होंने जीवन बचाना और स्वस्थ भारत के निर्माण नामक राष्ट्रव्यापी पहल का उद्घाटन किया।
सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने स्वास्थ्य के महत्व पर बल दिया और इस संबंध में सरकार द्वारा की गई विभिन्न पहलों का उल्लेख किया। इनमें आयुष्मान भारत योजना शामिल है। इस योजना के अन्तर्गत देश भर में 18 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं। इनमें मिशन इंद्रधनुष, टीबी मुक्त भारत और दुर्घटना पीड़ितों का समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री राहत योजना आदि शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि एमबीबीएस और मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ाई गई है और विभिन्न स्थानों पर एम्स और मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। चिकित्सा क्षेत्र में उभरती प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन के माध्यम से सरकार इस क्षेत्र में नई प्रगति को प्रोत्साहित कर रही है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत औषधि निर्माण में अग्रणी देशों में से एक है। लेकिन देश अभी भी चिकित्सा उपकरणों और आवश्यक दवाओं के आयात पर निर्भर है। इससे नागरिकों पर आर्थिक बोझ पड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत में ही इन उपकरणों और दवाओं के निर्माण की सुविधाएँ विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों से इस क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया। राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि मानसिक स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है और अक्सर इसकी उपेक्षा की जाती है।
महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने ‘जीवन बचाना और स्वस्थ भविष्य का निर्माण’ पहल की सराहना करते हुए कहा कि दूरदराज के गांवों तक पहुंचना और वहां रहने वालों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना एक पुण्य कार्य है। उन्होंने कहा कि मानवता की भलाई के लिए काम करना भारत की परंपरा है। राज्यपाल ने डॉक्टरों और चिकित्सा जगत से कैंसर, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और अग्नाशय संबंधी विकारों जैसी बीमारियों में वृद्धि के मूल कारणों की पहचान करने का आग्रह किया और स्वस्थ आहार, जीवनशैली और प्राकृतिक खेती के महत्व का उल्लेख किया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न उपायों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र और गैर-लाभकारी संगठन इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। श्री फडणवीस ने राज्य में स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में पी. डी. हिंदुजा अस्पताल के योगदान, विशेष रूप से पालघर जिले में दवा प्रतिरोधी तपेदिक, टाइप 1 मधुमेह और कुपोषित बच्चों पर किए गए शोध की सराहना की।
हिंदुजा अस्पताल के अध्यक्ष ए. पी. हिंदुजा ने कहा कि किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल उसके सकल घरेलू उत्पाद और बुनियादी ढांचे में ही नहीं, बल्कि उसके नागरिकों और प्रणालियों के स्वास्थ्य में भी निहित होती है। उन्होंने अस्पताल की स्थापना के उद्देश्य और पिछले 75 वर्षों के इसके सफर के बारे में विस्तार से बताया। श्री हिंदुजा ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नई तकनीक और बदलती जरूरतों के अनुरूप इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए अस्पताल की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
इस अवसर पर महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, महाराष्ट्र के मंत्री प्रकाश अबितकर, मंगल प्रभात लोढ़ा और जयकुमार रावल, विधानसभा अध्यक्ष राम शिंदे, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर, मुंबई की महापौर ऋतु तावड़े और अन्य उपस्थित थे।