राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि एक विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए न केवल राजनीतिक स्थिरता और मजबूत अर्थव्यवस्था की अवश्यकता है, बल्कि स्वस्थ, शिक्षित और जिम्मेदार नागरिकों की भी जरूरत है।
नई दिल्ली में सशक्त भारत के लिए कर्मयोग पर राष्ट्रव्यापी अभियान को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जनता की सक्रिय भागीदारी के बिना किसी भी राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि संतुलित और समग्र विकास के लिए प्रगति को नैतिकता और आध्यात्मिकता के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि आर्थिक विकास समृद्धि लाता है, और तकनीकी नवाचार, दक्षता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है, और ये दोनों मिलकर एक समृद्ध राष्ट्र की नींव रखते हैं।
राष्ट्रपति ने नागरिकों से परिणामों की चिंता किए बिना, ईमानदारी और समर्पण के साथ काम करने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन भी कर्मयोग का एक व्यावहारिक उदाहरण था। उन्होंने गीता में दिए गए कर्मयोग के उपदेशों को अपने जीवन में आत्मसात किया और आध्यात्मिकता को सामाजिक कार्य के साथ एकीकृत करके, अपने राजनीतिक कार्यों, सामाजिक सेवा और व्यक्तिगत अनुशासन को अपने जीवन में आत्मसात किया।