दिसम्बर 29, 2025 10:01 अपराह्न

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपशिष्ट प्रबंधन और सतत विकास के लिए तकनीकी, सामाजिक व आर्थिक दृष्टिकोण की आवश्यकता बताई

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि देश के सामने अपशिष्ट प्रबंधन और सतत विकास जैसी चुनौतियां हैं। इससे निपटने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण की भी आवश्यकता है। राष्ट्रपति आज झारखंड में सरायकेला खरसावां जिले में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान-एन.आई.टी, जमशेदपुर के 15वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं।

 राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्‍य केवल ऊंची इमारतों या मजबूत अर्थव्यवस्था से हासिल नहीं होगा, बल्कि समाज के वंचित वर्ग को सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित करके ही इसे प्राप्‍त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और ज्ञान तभी उपयोगी माने जाएंगे जब उनका लाभ आम लोगों तक पहुंचे। राष्‍ट्रपति ने कहा कि किसी भी तरह के आविष्‍कार में मानवता का पुट होना जरूरी है। ऐसे आविष्‍कार समाज के लिए वरदान साबित होते हैं।

राष्ट्रपति ने छात्रों से मानव कल्याण के लिए तकनीकी विकास का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों का मूल्यांकन केवल रैंकिंग और दाखिले के आधार पर नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनके योगदान के आधार पर भी किया जाना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि छात्रों को अपने ज्ञान का उपयोग एक समावेशी और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण में करना चाहिए। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मंत्री दीपक बिरुआ और एन.आई.टी जमशेदपुर के निदेशक प्रोफेसर गौतम सूत्रधार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।