दिसम्बर 25, 2025 4:40 अपराह्न

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में संथाली भाषा में संविधान का विमोचन किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में संथाली भाषा में संविधान का विमोचन किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि यह सभी संथाली लोगों के लिए गर्व और खुशी का विषय है कि अब संविधान संथाली भाषा में, ओलचिकी लिपि में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि इससे संथाली समुदाय के लोग अपने ही भाषा में संविधान को पढ़ और समझ सकेंगे।

 राष्ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष ओलचिकी लिपि की शताब्दी मनाई जा रही है। उन्होंने इस लिपि की शताब्दी वर्ष में संविधान को इस लिपि में उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री तथा उनकी टीम की सराहना की।

 इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आभार व्यक्त किया, जिनके मार्गदर्शन में यह पहल की गई। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण पहल संथाली भाषी लोगों को संविधान को पढ़ने और समझने में सक्षम बनाएगी। उपराष्ट्रपति ने बताया कि झारखंड की राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु ने जनजातीय कल्याण के लिए कई कदम उठाए थे और जनजातीय संस्कृति तथा भाषाओं को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया था।

इस अवसर पर कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी उपस्थित थे।

    संथाली भाषा, जिसे संविधान के 92वें संशोधन अधिनियम, 2003 के माध्यम से आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था, भारत की सबसे प्राचीन जीवित भाषाओं में से एक है। यह झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में बड़ी संख्या में जनजातीय लोगों द्वारा बोली जाती है।