भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत आज रायपुर स्थित हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि विधि क्षेत्र में एक लंबे और सफल करियर के लिए “सहयोग” और “धैर्य” दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि विधि का क्षेत्र कोई छोटी दौड़ नहीं बल्कि एक लंबी दौड़ है, जहां समय के साथ अनुभव से व्यक्ति का मूल्य बढ़ता है।
इस अवसर पर छह विद्यार्थियों को पीएचडी, अस्सी-आठ विद्यार्थियों को एल.एल.एम और एक सौ अड़तालीस विद्यार्थियों को बी.ए. एलएलबी. (ऑनर्स) की उपाधि प्रदान की गई। शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए दस स्नातक और तीन स्नातकोत्तर छात्रों को छत्तीस पदक प्रदान किए गए।