जनवरी 31, 2026 9:11 पूर्वाह्न

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मासिक धर्म स्‍वास्‍थ्‍य संविधान के तहत मौलिक अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मासिक धर्म स्‍वास्‍थ्‍य संविधान के तहत मौलिक अधिकार है। न्‍यायालय ने कहा कि संविधान के अनुच्‍छेद 21 के तहत मासिक चक्र जीने के अधिकार और निजता के अधिकार का आंतरिक अंग है। सुप्रीम कोर्ट ने लड़कियों और महिलाओं की प्रतिष्‍ठता, स्‍वास्‍थ्‍य और समानता सुनिश्चित करने के लिए राज्‍यों, केन्‍द्र शासित प्रदेशों और विद्यालयों को कई निर्देश दिये हैं।

   

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों को सभी स्‍कूलों में लड़कियों के लिए निशुल्‍क बायोडिग्रेडेबल सैनेटरी नेपकिन निशुल्‍क उपलब्‍ध कराने का निर्देश दिया। न्‍यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और आर. महादेवन की पीठ ने एक याचिका पर यह महत्‍वपूर्ण फैसला सुनाया। याचिका में लडकियों के लिए स्‍कूलों में निशुल्‍क सेनेटरी पैड और पर्याप्‍त स्‍वच्‍छता सुविधाएं उपलब्‍ध कराने की मांग की गई थी।  

 

न्‍यायालय ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि प्रत्‍येक स्‍कूल में लडकों और लडकियों के लिए अलग-अलग शौचालय हों। न्‍यायालय ने यह भी स्‍प्‍ष्‍ट किया कि सरकारी और निजी सभी तरह के शिक्षण संस्‍थाओं के लिए इस आदेश का पालन करना अनिवार्य है। 

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